उसी चैतन्य से ओट-प्रोत है I यह पूरा विश्व ही एक मंदिर है I सर्वत्र ब्रह्म का वास है I वही भीतर है और वही बाहर है I लेकिन इस सर्वव्यापी परमात्मा को जानने के लिए हमे सबसे पहले उसे अपने भीतर तलाशना होगा I ध्यान में हम वही कोशिश करते है I अपने भीतर ईश्वर की खोज I
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As regards Yakshini Siddhi
ज्योतिष शास्त्र के अधिकारी विद्वान ने मूल संस्कृत श्लोको में वर्णित समस्त सिद्धान्त एवं योगो का सरल एवं विशद विवेचन हिन्दी भाषा में किया है i इस प्रकार यह पुस्तक ज्योतिष शास्त्र के अनुरागियों तथा सिद्धहस्त विद्वानों के लिए समान रूप से पठनीय एवं संग्रहणीय है l
Some out of those horoscopes have been included in this book
Rasratnakar Ridhi Khand [Hindi] VBD Publishers उसी चैतन्य से ओट-प्रोत हैBy Swami Nath Mishr , , l , , , , l l , . l